16. प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन

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                                                      7. प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन



1. हमें वन एवं वन्य जीवन का संरक्षण क्यों करना चाहिए?

                                                  [JAC 2009 (A)]

उत्तर : वन्य जीवन को अग्रलिखित कारणों से सुरक्षित रखना चाहिए―

(i) प्रकृति में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए।

(ii) जीन पूल की सुरक्षा के लिए। वन्य जीवन का संरक्षण राष्ट्रीय पार्क तथा पशुओं और पक्षियों के लिए शरणस्थल बनाने से किया जा सकता है। यह पशुओं का शिकार करने की निषेध आज्ञा का कानून प्राप्त करके किया जा सकता है।


2. वन प्रबंधन में जन भागीदारी का एक उदाहरण दें। [JAC 2010 (A)]

उत्तर : वन प्रबंधन में जनता अपने खेतों की मेड़ पर, सड़क के किनारे,पोखर के किनारे वृक्षारोपण कर सकती है। इस कार्य से वन विकास संभव है। रोपे गये पौधों को जन भागीदार द्वारा संवर्धन किया जा सकता है।


3. वनों के संरक्षण के तीन उपाय लिखिए। [JAC 2009 (A). 2014 (A)]

उत्तर : वनों के संरक्षण के तीन उपाय निम्न है-(i) वन में से उन्हीं पेड़ो को काटने की सरकार द्वारा अनुमति देना जो सूख गए है अथवा पूर्ण प्रौढ़ हो चुके हैं। 

(ii) बंजर तथा परती भूमि पर सघन वृक्षारोपण के कार्यक्रमों का संचालन। 

(iii)जनता में जागरूकता पैदा कर वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित करना।


4. तीन सरल विकल्पों को लिखें जिनसे हमारी ऊर्जा खपत में अन्तर पड़ सकता है। [JAC 2009 (S)]

उत्तर : तीन सरल विकल्प इस प्रकार हैं―

(i) कूकर के प्रयोग से ऊर्जा की खपत में भारी अंतर संभव है।

(i) सौर ऊर्जा का अधिकाधिक प्रयोग से।

(iii) बायो ऊर्जा का प्रयोग कर।


5. वन्य सम्पदा की सुरक्षा के लिए कौन-कौन-से उपाय हैं?

                                                   [JAC 2010(A)]

उत्तर : वन्य सम्पदा की सुरक्षा के अनलिखित उपाय है―

(i) वृक्षों का काटना बन्द होना चाहिए।

(ii) केवल वे ही वृक्ष काटे जाएँ जो सूख जाएँ या जिन्हें कोई गम्भीर बीमारी लग जाए और उनके स्थान पर नये वृक्ष लगाये जाने चाहिए।

(iii) वृक्षों की प्रति वर्ष गिनती की जानी चाहिए और वृक्षारोपण के लक्ष्य को पूर्ण करना चाहिए।

(iv) नये लगाए गए वृक्षों की देखभाल करनी चाहिए।


6. ऐसे तीन कार्य लिखें जिनसे आप प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कर सकते हैं। [JAC 2010 (A)]

उत्तर : (i) हमें अपने संसाधनों का मितव्ययितापूर्वक उपयोग करना चाहिए तथा उनकी बर्बादी को रोकना चाहिए। 

(ii) पुरानी बेकार वस्तुओं को फेक देने के बजाय उनको उपयोगी बनाकर फिर से उपयोग में लाना। धातुओं के टुकड़ों, प्लास्टिक इत्यादि को बेच देने से ये सामान फैक्टरियों तक पहुँच जाते हैं और इनसे नई वस्तुएँ बना दी जाती है। पुराने कपड़ों को फेंकने के बजाय गरीबों को दान देना बेहतर उपाय है।



7. खादिन क्या है? यह पर्यावरण संरक्षण से किस प्रकार संबंधित है?

                                                      [JAC 2011 (A)]

उत्तर : 'खादिन' भारत के राजस्थान राज्य में कृषि के उपयोग हेतु प्रचलित एक पारम्परिक जल-संरक्षण की विधि है। खादिन वास्तव में एक लम्बी बाँध संरचना है जिसका निर्माण ढालू कृषि क्षेत्र के आर-पार किया जाता है। वर्षा का जल कृषि-क्षेत्र से होता हुआ नीचे उतरता है परन्तु खादिन-बाँध द्वारा रोक लिया जाता है। बाँध के पीछे छिल्ला कुआँ खोद दिया जाता है ताकि यदि जल खादिन की ऊँचाई स्तर से ऊपर उठे तो वह बाहर जाकर कुएँ में भरता रहे। इस प्रकार खादिन क्षेत्र में जमा जल धीरे-धीरे भूमि में समा जाता है और कुएं के द्वारा जो जल भूमि में जाता है वह भूमिगत जलस्तर को ऊपर उठाता है। इस प्रकार खादिन संरचना द्वारा वर्षा के जल का उपयोग किया जाता है।



8. मृदा संरक्षण के तीन उपाय लिखिए। [JAC 2013 (A)]

उत्तर : इसके लिए निम्नांकित तीन उपाय किए जा सकते हैं―

(i) भूमि-कटाव को रोकना―इसके लिए वनों की कटाई पर रोक,अतिचारण पर रोक एवं भूमि को परती न छोड़ना जैसे उपाए किये जाने चाहिए।

(ii) पहाड़ी क्षेत्रों में कन्टूर सिंचाई एवं कंटूर खेती को बढ़ावा देना।

(iii) पहाड़ी ढलानों पर गुल्ली बनाकर उतरते हुए जल के वेग को कम करना।


9. समन्वित वन-प्रवंधन पर टिप्पणी लिखिए।

                                                   [JAC 2015 (A)]

उत्तर : वनों के संरक्षण के लिए निम्नांकित उपाय किये जा सकते हैं―

(i) वनों की कटाई पर रोक लगाना

(ii) वन रोपण

(iii) वनों में क्षतिपूरक वृक्षारोपण

(iv) कृषि के विस्तार के लिए वृक्षों की कटाई पर रोक लगाना

(v) इंधन के लिए लकड़ियों की कटाई पर रोक लगाना

(vi) लकड़ियों के अवैध व्यापार पर रोक लगाना।



10. गंगा जल के प्रदूषण की किन्हीं तीन परिस्थितियों (कारणों) का उल्लेख कीजिए। [JAC 2016 (A)]

उत्तर : गंगा जल प्रदूषण की तीन परिस्थितियाँ निम्न है―

(i) शहरों के गंदे जल का गंगा में बहाव।

(ii) गंदे वस्त्रों एवं जानवरों को गंगा में धोना।

(iii) डाल्फीन का अधिक शिकार से।


11. अपने घर को पर्यावरण-मित्र बनाने के लिए आप कौन-कौन-से परिवर्तन करेंगे?

उत्तर :

(i) घर के आसपास के खाली स्थानों में फूल और अन्य पेड़-पौधे लगाना होगा।

(ii) जल का नियंत्रित उपयोग करना होगा ताकि व्यर्थ बहने से बचाया जा सके।

(iii) वर्षा-जल के संचयन की व्यवस्था करनी होगी।

(iv) एक छोटे वर्मी कम्पोस्ट की व्यवस्था करनी होगी जिससे घर के कूड़े-कचरे का खाद बनाया जा सके।




12. प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग में दीर्घकालिक दृष्टिकोण रखना क्यों आवश्यक है?

उत्तर : निम्नांकित कारणों से प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग में दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

(i) संसाधनों के निर्ममतापूर्वक दोहन से पर्यावरण को काफी क्षति पहुँचती है। अतः, संसाधनों के संपोषण के साथ पर्यावरण का संरक्षण आवश्यक है। प्रदूषकों का एकत्रित होना पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुँचा सकता है।

(ii) सीमित संसाधनों का वितरण सभी वर्ग के लोगों में समान रूप से करना तथा उनकी उपलब्धता भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।


13. पर्यावरण-मित्र बनने के लिए आप अपनी आदतों में कौन-से परिवर्तन ला सकते हैं?

उत्तर : पर्यावरण की सुरक्षा ही पर्यावरण-मित्र बनना है। इसके लिए प्राकृतिक संसाधनों का सीमित एवं विवेकपूर्ण उपयोग करने, अनुपयोगी वस्तुओं को गलाकर उपयोगी वस्तुएँ बनाने एवं वस्तुओं का पुनः उपयोग और वस्तुओं के पुनर्चालन की आदत डालनी चाहिए। वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करना और ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोतों का उपयोग करना भी पर्यावरण-मित्र बनना ही है।


14. क्या प्राकृतिक संसाधनों का समान वितरण होना चाहिए? संसाधनों के समान वितरण के विरुद्ध कौन-कौन-सी शक्तियाँ कार्य कर सकती है?

उत्तर : हाँ, प्राकृतिक संसाधनों का वितरण सभी वर्गों में समान रूप से होना चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों के विरुद्ध शक्तिशाली और अमीर लोग तथा उद्योगपति कार्य कर सकते हैं।


15. वन एवं वन्य जीव हमारे लिए किस प्रकार से लाभदायक हैं?

उत्तर : वन एवं वन्य जीव पर्यावरण को सुरक्षित एव सतुलित रखने में सहायक होते हैं। वन पर्यावरण की सुरक्षा के साथ-साथ हमारी मूलभूत आवश्यकताओं, जैसे-आवास निर्माण सामग्री, ईंधन, भोजन एकत्र करने एवं उसके भंडारण के लिए साधन, औजार, दुर्लभ औषधियाँ, रबर आदि।

आपूर्ति करते है। जल-चक्र का पूर्ण होना, वायुमंडल में CO₂ एवं O₂ का संतुलन वनों पर ही निर्भर है। इसमें वन्य जीव सुरक्षित रहते जो पर्यावरण को संतुलित रखने में योगदान करते हैं। वन मिट्टी अपरदन को नियंत्रित करते हैं।अतः, वन एवं वन्य जीवों का संरक्षण आवश्यक है।



16, वन एवं वन्य जीवों के दावेदार कौन-कौन हैं? उनमें किसे वन प्रबंधन का अधिकार मिलना चाहिए?

उत्तर : वन एवं वन्य जीवों के चार दावेदार होते हैं।

(i) वनों में या उनके आसपास रहनेवाले लोग, जो अपनी

आवश्यकताओं के लिए वनों पर निर्भर है

(ii) सरकार, जिसका वन पर स्वामित्व और नियंत्रण है

(iii) उद्योगपति, जो वन उत्पादों का उपयोग करते है

(iv) पर्यावरण-मित्र 

वनों के बेहतर प्रबंधन के लिए सरकार का न्यूनतम नियंत्रण स्थानीय लोगों की सहमति और सक्रिय भागीदारी और पर्यावरण-मित्रों का सहयोग अपेक्षित है।



17. वन्य जीवों के संरक्षण के विभिन्न उपायों का उल्लेख करें।

उत्तर : वन्य जीवों के संरक्षण के लिए निम्नांकित उपाय करने चाहिए।

(i) पशु-पक्षियों की सुरक्षा के लिए वन बिहार राष्ट्रीय उद्यान तथा अन्य प्राकृतिक क्षेत्रों की स्थापना तथा इन क्षेत्रों में उनके आवास के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना

(ii) लुप्त होती जा रही प्रजातियों (जैसे―गिर-शेर) की संख्या बढ़ाने के लिए परियोजना बनाना

(iii) जानवरों के शिकार पर लगे प्रतिबंध का कड़ाई से पालन करना ।


18. जल-संग्रहण आवश्यक है, क्यों?

उत्तर : जल को जीवन-सार कहते हैं, क्योंकि इसके बिना जीवन संभव नहीं है। इसका उपयोग हम प्रतिदिन अनेक प्रयोजन, जैसे―दैनिक कार्यों,शारीरिक क्रियाओं, सिंचाई, बिजली उत्पादन तथा तकनीकी विकास आदि में करते हैं। औद्योगिक क्रांति एवं जनसंख्या वृद्धि के कारण जल की माँग में काफी वृद्धि हुई है, परंतु उसकी उपलब्धता में कमी आई है। भूमिगत जल के भंडारों में कमी आई है तथा भूमिगत जलस्तर गिरता जा रहा है। फलतः शहरों में जलापूर्ति की समस्या गंभीर होती जा रही है। अतः, वर्षा-जल का संग्रहण आवश्यक है ताकि भूमिगत जलस्तर बरकरार रहे।


19. तीन Rs में से दूसरे R का क्या अर्थ है?

उत्तर : दूसरे R का अर्थ है Recycle अर्थात् पुनः चक्रण। इसका अर्थ है कि हमें प्लास्टिक, कागज, काँच, धातु की वस्तुएँ आदि पदार्थों का पुनः चक्रण करके इनसे उपयोगी वस्तुएं बनानी चाहिए। हमें ऐसी चीजों को कचरे के डिब्बे में नहीं डालना चाहिए बल्कि इन्हें अपने कचरे से अलग करना होगा ताकि यह दुबारा उपयोगी बनायी जा सके।


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15. हमारा पर्यावरण

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                                                         6. हमारा पर्यावरण


1. पीड़कनाशी रसायनों का अत्यधिक प्रयोग किस प्रकार 'जैव आवर्धन' की समस्या उत्पन्न कर रहे हैं? [JAC 2009 (A)]

उत्तर : अपशिष्ट पदार्थों के जमाव से बीमारियों के सूक्ष्मजीव बढ़ते और फैलते है। इससे तरह-तरह की बीमारियाँ फैलती हैं। ये जल तथा मृदा को भी दूषित करते है तथा जैव-भू-रसायन चक्रों को बाधित करते हैं। इनका उचित निष्पादन आवश्यक है। जैव अनिम्नीकरणीय पदार्थ (जैसे कीटनाशक रसायन)आहार श्रृंखला के माध्यम से पौधों द्वारा अवशोषित हो जाने के बाद उपभोक्ताओं के शरीरों के वसीय ऊतकों में संचित होते रहते हैं। चूँकि मनुष्य सर्वोच्च उपभोक्ता है, अतः ये रसायन मनुष्य के शरीर में अन्तिम रूप से पहुँचते है और संचित हो जाते हैं। वहाँ मनुष्य के वसीय ऊतकों में इन पदार्थों का सान्द्रण बढ़ता रहता है। इसे जैव आवर्धन कहते हैं। जैव आवर्धन एक अत्यन्त खतरनाक स्थिति है।


2. परितंत्र क्या है? इसके विभिन्न घटकों के नाम तथा उदाहरण लिखें।

                                                 [JAC 2010 (A)]

उत्तर : जीवमंडल की वह इकाई जिसके अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक पारस्परिक रूप से एवं अजैवी घटकों सेअन्तःक्रिया करते हुए गत्यात्मक एवं समन्वयात्मक जीवन व्यतीत करते हैं,पारितंत्र कहलाती है।परितंत्र के विभिन्न घटक―जैविक एवं अजैविक घटक।


3. ओजोन क्या है तथा यह किसी पारितंत्र को किस प्रकार प्रभावित करती है? [JAC 2009 (S), 2014(A)]

उत्तर : ओजोन ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बना एक अणु है जिसका रासायनिक सूत्र 0, है। यह 15 km से 50 km की ऊँचाई पर वायुमंडल की ऊपरी सतह पर एक पतले परत के रूप में सुरक्षात्मक छतरी का निर्माण करता है। यह सूर्य प्रकाश में मौजूद घातक पराबैगनी विकिरण को अवशोषित कर पृथ्वी पर पहुँचने नहीं देता है। पराबैगनी विकिरण त्वचा-कैसर जैसे अनेक घातक रोगों को उत्पन्न करती है। इस प्रकार यह ओजोन-स्तर हमारी रक्षा करता है।


4. ओजोन परत का अपक्षय चिंता का विषय क्यों है? इसकी क्षति को सीमित करने के लिए क्या उपाय किये जा रहे हैं? [JAC 2011 (A)]

उत्तर : विभिन्न रासायनिक कारणों से ओजोन परत को क्षति बहुत तेजी से हो रही है। क्लोरोफ्लोरोकार्बनों की वृद्धि के कारण ओजोन परत में छिद्र उत्पन्न हो गए हैं जिनसे सूर्य के प्रकाश में विद्यमान पराबैंगनी विकिरणें सीधे पृथ्वी पर आने लगी हैं जो कैंसर और त्वचा रोगों के कारण बन रहे हैं। ओजोन परत पराबैंगनी (UV) विकिरणों का अवशोषण कर लेती है।

इस क्षति को सीमित करने के लिए 1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UHEP) में सर्वसम्मति यही बनी है कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCₛ) के उत्पादन को 1986 के स्तर पर सीमित रखा जाए। मांट्रियल प्रोटोकोल में 1987 में सन् 1998 तक क्लोरोफ्लोरोकार्बन के प्रयोग में 50% की कमी करने की बात कही गई। सन् 1992 में मांट्रियल प्रोटोकॉल की मीटिंग में 1996 तथा CFCₛपर धीरे-धीरे रोक लगाने को स्वीकार किया गया। अब क्लोरोफ्लोरोकार्बन की जगह हाइड्रोफ्लोरोकार्बनों का प्रयोग आरंभ किया गया है जिसमें ओजोन परत को क्षति पहुँचाने वाले क्लोरीन या ब्रोमीन नहीं हैं। जनसामान्य में इसके प्रति भी सजगता लगभग नहीं है।


5. आप कचरा निपटान की समस्या कम करने में क्या योगदान कर सकते हैं? किन्हीं दो तरीकों का वर्णन कीजिए। 

                                                      [JAC 2010 (S)]

उत्तर : कचरा व्यक्ति और समाज दोनों के लिए अति हानिकारक हैक्यों कि इससे केवल गंदगी ही नहीं फैलती बल्कि यह अनेक प्रकार की बीमारियों का कारण भी बनता है। इसे निपटाने के लिए निम्नलिखित दो तरीकों को अपनाया जा सकता है।

(i) पुन:चक्रण : कचरे मे से कागज, प्लास्टिक, धातुएँ, चिथड़े आदि चुन कर अलग करके उनका पुन:चक्रण किया जाना चाहिए। पुराने कागज और कपड़े के पुनःचक्रण से पेड़ों को कटने से बचाया जा सकता है। प्लास्टिक का बार-बार उपयोग किया जा सकता है।

(ii) मिट्टी में दबाना : जैव निम्नीकरणीय पदार्थों को मिट्टी में दबा कर कचरे का निपटान किया जा सकता है। उससे खाद प्राप्त कर खेतों में प्रयुक्त किया जा सकता है।



6. ऐसे दो तरीके बताइए जिनमें अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं। [JAC 2016(A), 2018(A)]

उत्तर : (i) अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ अपने अनिम्नीकरणीय स्वभाव के कारण निष्पादन की समस्या उत्पन्न करते हैं तथा परिदृश्य को गंदा करते है। 

(ii) इन पदार्थों से प्रायः अत्यन्त हानिकारक गैसीय प्रदूषक निकलते हैं जो स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त खतरनाक होते है।


7. किसी घास के मैदान की आहर श्रृंखला को प्रवाह-चार्ट द्वारा प्रदर्शित कीजिए। [JAC 2015 (A)]

उत्तर:


घास (Grass)→कीड़े (Insects)→गेदक (frog)→सर्प (Snake)


8. परितंत्र में अपघटकों की क्या भूमिका है? [JAC 2016 (A)]

उत्तर : पारिस्थितिक संतुलन को कायम रखने में अपघटन की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह पौधे तथा जन्तुओं के मृत शरीर तथा अन्य वद्य पदार्थों का जीवाणुओं और कवको के द्वारा अपघटन करता है। ये जीवाणु मृत जीवों के शरीर में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों को अकार्बनिक तत्त्वों में मुक्त कर देते है।

जो विभिन्न गैसों के रूप में वायुमंडल में चले जाते हैं। अन्य ठोस एवं द्रव्य पदार्थ मिट्टी में मिल जाते हैं। इस प्रकार वह पारिस्थितिक संतुलन कायम करने का प्रयास करता है।


9. पारितंत्र में अपमार्जकों का क्या महत्त्व/भूमिका है? [JAC 2017(A)]

उत्तर : अपमार्जकों की उपस्थिति में जलीय सूक्ष्म जीवाणुओं का अपघटन सरलता से नहीं हो पाता जिससे वे जल में लंबे समय तक विद्यमान रहते हैं जिसके परिणामस्वरूप जलीय जीव प्रभावित होते हैं। फॉस्फेट युक्त अपमार्जक में शैवाल अत्यधिक वृद्धि करते हैं जिससे पानी में मछलियों या अन्य जीवों के लिए ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।


10. पोषी स्तर क्या है? एक आहार मंखला का उदाहरण दीजिए तथा इसमें विभिन्न पोषी स्तर बनाइए। [JAC 2012 (A). 2015 (A), 2017(A)]

उत्तर : आहार श्रृंखला में कई स्तर होते हैं तथा हर स्तर पर भोजन (ऊर्जा) का स्थानांतरण होता है। आहार श्रृंखला के इन्हीं स्तरों को पोषी स्तर कहते है। एक मैदानी पारिस्थितिक तंत्र में घास प्रथम पोषी स्तर, ग्रास हॉपर द्वितीय पोषी स्तर,मेंढक तृतीय पोषी स्तर, सर्प चतुर्थ पोषी स्तर तथा बाज उच्चतम पोषी स्तर है।


11. नदी पर बाँध बनाने से क्या लाभ हैं? कोई दो लाभ लिखिए।

                                                       [JAC 2017(A)]

उत्तर : बाँध के निर्माण से सिंचाई के लिए सहजता से जल उपलब्ध होता है तथा पनबिजली का उत्पादन होता है। नहर के द्वारा बाँध के जल की सिंचाई के लिए सुदूर देहातों में ले जाया जाता है। बाँध एवं नहर की सहायता से सिंचाई की समुचित व्यवस्था के लिए इंदिरा गाँधी नहर को देखा जा सकता है जिसने राजस्थान जैसे मरुस्थल वाले प्रदेश के कुछ हिस्से को हरा-भरा कर दिया है।


12. नदी पर वाँध बनाने से क्या लाभ हैं? कोई दो लाभ लिखिए।

                                                  [JAC 2019(A)]

उत्तर : बाँध के निर्माण से सिंचाई के लिए सहजता से जल उपलब्ध होता है तथा पनबिजली का उत्पादन होता है। नहर के द्वारा बाँध के जल की सिंचाई के लिए सुदूर देहातों में ले जाया जाता है। बाँध एवं नहर की सहायता से सिंचाई की समुचित व्यवस्था के लिए इंदिरा गाँधी नहर को देखा जा सकता है जिसने राजस्थान जैसे मरुस्थल वाले प्रदेश के कुछ हिस्से को हरा-भरा कर दिया है।


13. क्या कारण है कि कुछ पदार्थ जैव निम्नीकरणीय होते हैं और कुछ अजैव निम्नीकरणीय?

उत्तर : पदार्थों के निम्नीकरण के लिए विशिष्ट इंजाइमों की आवश्यकता है। एक एंजाइम बहुत-से पदार्थों का निम्नीकरण नहीं कर सकता है।

विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीव जैसे जीवाणु और कवक तरह-तरह के एंजाइम वित करते हैं। परन्तु अलग-अलग प्रकार के पदार्थों के निम्नीकरण के लिए अलग-अलग प्रकार के एंजाइम की आवश्यकता होती है। कुछ ऐसे भी पदार्थ हैं

(जैसे प्लास्टिक) जिनका निम्नीकरण सूक्ष्म जीव नहीं कर पाते हैं। यही कारण है कि कुछ पदार्थ जैव निम्नीकरणीय होते हैं जबकि कुछ पदार्थ ऐसे नहीं होते हैं।


14. ऐसे दो तरीके सुझाइए जिनमें जैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं?

उत्तर : (i) जैव निम्नीकरणीय पदार्थ अपघटित होते समय दुर्गध एवं हानिकारक गैसें मुक्त करते हैं जिससे सामुदायिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। 

(ii) जैव निम्नीकरणीय पदार्थों के साथ बीमारियों के सूक्ष्मजीव पलते हैं जो बिमारियाँ फैलाते हैं तथा अन्य स्रोतों को भी संदूषित और संक्रमित करते हैं।


15. पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह अचक्रीय होता है, कैसे?

उत्तर : सूर्य की विकिरण ऊर्जा प्रकाश संश्लेषण के समय रासायनिक बन्धन ऊर्जा के रूप में भोजन की संचित हो जाती है। यह ऊर्जा आहार श्रृंखला के माध्यम से सर्वोच्च उपभोक्ता तक पहुँचती है। सर्वोच्च उपभोक्त की मृत्युऔर अपघटन के समय यह ऊर्जा मुक्त होकर वातावरण में चली जाती है। इसप्रकार पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह अचक्रीय होता है।


16. ओजोन परत के अपक्षय के क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं?

उत्तर : विभिन्न रासायनिक कारणों से ओजोन परत को क्षति बहुत तेजी से हो रही है। क्लोरोफ्लोरोकार्बनों की वृद्धि के कारण ओजोन परत में छिद्र उत्पन्न हो गए हैं जिनसे सूर्य के प्रकाश में विद्यमान पराबैंगनी विकिरणे सीधे पृथ्वी पर आने लगी हैं जो कैंसर और त्वचा रोगों के कारण बन रहे हैं।


17. वायुमंडल का निर्माण कैसे हुआ तथा इसमें परिवर्तन कैसे हुआ?

उत्तर : प्रारंभिक काल में पृथ्वी का आकार काफी बड़ा था । तब पृथ्वी का कोई वायुमंडल नहीं था। इसके बाद पृथ्वी ने सिकुड़ना शुरू किया जिस कारण यह छोटी तथा गर्म होती गयी। इस दौरान गैस विमोचित हुई तथा वायुमंडल बना। वायुमंडल में कई प्रकार की गैसें इकट्ठी हुईं। जब परपोषी से स्वपोषी. का निर्माण हुआ तो ऑक्सीजन भी स्वतंत्र रूप से बना।वायुमंडल के अन्य घटक ज्वालामुखी के फटने पर बनते गए।


18. पारिस्थितिक तंत्र में उत्पादकों के क्या कार्य है?

उत्तर : पारिस्थितिक तंत्र में उत्पादक (हरे पौधे) सूर्य प्रकाश को ग्रहण कर भोजन का निर्माण करते हैं जिनपर अन्य जीव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर होते हैं। जो वायुमंडल में ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड गैस के बीच संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं। हरे पौधे वायुमंडलीय प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।


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