6. धातु एवं अधातु

||सोना एवं चाँदी का उपयोग आभूषण बनाने के लिए किया जाता है।इसका कारण बताइए ||धातुओं के किन्हीं तीन रासायनिक गुणों का उल्लेख करें ||सोडियम को किरोसिन तेल में डुबोकर क्यों रखा जाता है?|| [JAC 2017(A)] ||


    






                       3. धातु एवं अधातु

                        

1. शुद्ध सोना कितने कैरेट का होता है? [JAC 2009 (A)]

उत्तर: 24


2. एक ऐसी धातु का उदाहरण दें जो प्रकृति में स्वतंत्र अवस्था में पायी जाती है।                             

                                             [JAC 2009 (S)]

उत्तर : सोना एवं प्लैटिनम प्रकृति में स्वतंत्र अवस्था में पाए जाते हैं।


3. लेड एवं टिन की एक मिश्रधातु का नाम लिखें।

                                                         [JAC 2010 (S)]

उत्तर : सोल्डर।


4. एक ऐसे धातु का नाम बताएँ जो कमरे के ताप पर द्रव होती है।

                                                    [JAC 2013 (A)]

उत्तर : पारा (Hg)


5. एक ऐसे अधातु का उदाहरण दें जो द्रव अवस्था में रहती है।

                                                         [JAC 2020 (A)]

उत्तर : ब्रोमीन (Br)


6. ताँबा एवं जस्ते की मिश्रधातु का नाम क्या है?

                                 [JAC 2010 (A), 2017(A)]

उत्तर : पीतल।


7. सोल्डर नामक मिश्रधातु के कौन-कौन से अवयव हैं? [JAC 2011 (A)]

उत्तर : लेड (Pb) + टिन (Sn)


8. एक ऐसी अधातु का नाम लिखिए जो गैसीय अवस्था में पायी जाती है।

                                                  [JAC 2014(A)]

उत्तर : ऑक्सीजन।


9. ऐक्वारेजिया क्या है? [JAC 2012 (A)]

उत्तर : ऐक्वारेजिया H₂SO₄ एवं HNO₃ का मिश्रण है।


10. इस्पात में कौन-सी अधातु उपस्थित रहती है?

                                                 [JAC 2016(A)]

उत्तर : कार्बन।


11. ताँबा और टिन की मिश्रधातु का क्या नाम है?

                                              [JAC 2015 (A)]

उत्तर : काँसा।


12. लेड एवं टिन की एक मिश्रधातु का नाम लिखिए।

                                                      [JAC 2019 (A))

उत्तर : सोल्डर (टाँका)।


13. उस धातु का नाम बताएँ जो विद्युत का कुचालक होता है।

उत्तर : लेड (Pb)


14. एक ऐसे धातु का नाम लिखें जिसे चाकू से आसानी से काटा जा सकता है।

उत्तर : सोडियम (Na)


15. एक ऐसे धातु का नाम लिखें जो विद्युत का सर्वोत्तम चालक है।

उत्तर : चाँदी (Ag)


16. एक ऐसे धातु का नाम बताएँ जो ऊष्मा की सबसे अच्छी चालक होती है।

उत्तर : चाँदी (Ag)


17. एक ऐसे धातु का नाम बताएँ जो ऊष्मा की कुचालक होती है।

उत्तर : लेड (Pb)


18. एक ऐसे धातु का उदाहरण दें जो विद्युत का कुचालक होता है।

उत्तर : लेड (Pb)


19. एक ऐसे धातु का नाम लिखें जो हथेली पर रखने से पिघलने लगती है।

उत्तर : सीजियम (Cs)


20. उस धातु का नाम बताएँ जिसे किरोसिन में डुबोकर रखा जाता है।

उत्तर : सोडियम (Na)


21. एक ऐसे अधातु का उदाहरण दें जो विद्युत का सुचालक होता है।

उत्तर : ग्रेफाइट (कार्बन का अपरूप)


22. एक ऐसे आधातु का उदाहरण दें जो अत्यंत कठोर है।

उत्तर : हीरा (कार्बन का अपरूप)


23. दो धातुओं के नाम बताएँ जिनका गलनांक अति निम्न होता है।

उत्तर : गैलियम तथा सीजियम।


24. दो ऐसी धातुओं के नाम बताएँ जो HNO₃ के साथ हाइड्रोजन गैस बनाती है।

उत्तर : मैग्नीशियम (Mg) एवं मैंगनीज (Mn)


25. धातुओं में सर्वाधिक तन्य कौन होते हैं?

उत्तर : सोना एवं चाँदी सभी धातुओं से अधिक तन्य होते हैं।


26. सल्फाइड अयस्क का सांद्रण किस विधि द्वारा होता है?

उत्तर : फेन-प्लवन विधि द्वारा


27. लोहा का प्रमुख अयस्क क्या है?

उत्तर : लोहा का प्रमुख अयस्क हेमाटाइट (Fe₂O₃) हैं।


28. बॉक्साइट किस धातु का प्रमुख अयस्क है?

उत्तर : ऐलुमिनियम का


29. ऐलुमिनियम के एक अयस्क का नाम एवं सूत्र लिखें।

उत्तर : ऐलुमिनियम का प्रमुख अयस्क बॉक्साइट

             (AI₂O₃ . 2H₂O) है।


30. दो धातुओं के नाम बताएँ जो तनु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं कर सकती हैं।

उत्तर : सोना और प्लैटिनम।


31. धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त होने वाली कौन-सी प्रक्रिया है?

उत्तर: अपचयन।


32. अधातुएँ ऑक्सीजन से संयोग करके कैसा ऑक्साइड बनाती हैं?

उत्तर : अम्लीय ऑक्साइड।


33. पारा धातु के एक मुख्य अयस्क का नाम लिखें।

उत्तर : सिनेबार (Hgs)

34. काँसा के मुख्य अवयवों का नाम लिखिए।

उत्तर : ताँबा (Cu) एवं टिन (Sn)


35. सर्वाधिक कम क्रियाशील धातु को छाँटिए-

K, Zn, Ca, Au, Ag

उत्तर : Au (सोना)।


                               2 अंक स्तरीय प्रश्न

2. सोना एवं चाँदी का उपयोग आभूषण बनाने के लिए किया जाता है।इसका कारण बताइए। [JAC 2017(A)]

उत्तर : सोना, चाँदी और प्लैटिनम अत्यंत कम अभिक्रियाशील चमकीली धातु है। सामान्य ताप पर वायु और जलवाष्प से इनका संक्षारण प्रायः नहीं होता है। अतः, ये अपनी चमक बनाए रखते हैं और इसलिए आभूषण बनाने के लिए उपयुक्त धातु हैं।


3. उभयधर्मी ऑक्साइड क्या होते हैं? दो उदाहरण दीजिए।

                                                      [JAC 2019(A)]

उत्तर: धातु के वैसे ऑक्साइड जो अम्ल एवं क्षार दोनों से अभिक्रिया कर लवण तथा जल बनाते हैं उसे उभयधर्मी ऑक्साइड कहते है।

जैसे―AI₂O₃, ZnO इत्यादि।

Al₂O₃ की अभिक्रिया―

               Al₂O₃ +6HCl → 2AICI₃ + 3H₂O

               Al₂O₃ + 2NaOH → 2NaAIO₂ + H₂O


4. सोडियम को किरोसिन तेल में डुबोकर क्यों रखा जाता है?

                                                        [JAC 2020 (A)]

उत्तर : सोडियम सामान्य ताप पर नमी एवं हवा में उपस्थित ऑक्सीजन के साथ तेजी से अभिक्रिया कर सोडियम ऑक्साइड बना देती है।

                       4Na + O₂ → 2Na₂O

सोडियम किरोसिन तेल में न तो घुलती है और न अभिक्रिया कर पाती है।इसलिए इसे किरोसिन में डुबोकर रखा जाता है।


5. खनिज किसे कहते हैं? दो उदाहरण दें।

उत्तर : धातु या उसके यौगिकों से युक्त विशिष्ट रासायनिक रचना एवं क्रिस्टलीय संरचना वाले वैसे प्राकृतिक पदार्थ जो पृथ्वी तल या उसके नीचे खदानों में पाए जाते हैं, खनिज कहलाते हैं। इनमें बालू, मिट्टी एवं चट्टानों के छोटे-छोटे टुकड़े अशुद्धि के रूप में वर्तमान रहते हैं। बॉक्साइट (AI₂O₃ . 2H₂O), चीनी मिट्टी (AI₂O₃ . 2SiO₂ . 2H₂O), रॉकसाल्ट (NaCl)

आदि खनिज के उदाहरण हैं।

6. अयस्क किसे कहते हैं? दो उदाहरण दें।

उत्तर : वैसे खनिज जिनसे शुद्ध धातुओं को सुगमतापूर्वक एवं कम खर्च में ही व्यापारिक मात्रा में प्राप्त किया जा सकता है, अयस्क कहलाते हैं। कुछ प्रमुख अयस्क है-बॉक्साइट (AI₂O₃ . 2H₂O), चूना-पत्थर (CaCO₃) आदि।


7. किसी धातु M के वैद्युत अपघटनी परिष्करण में आप ऐनोड, कैथोड एवं वैद्युत अपघट्य किसे बनाएँगे?

उत्तर : धातु M के वैद्युत अपघटनी शोधन में अशुद्ध धातु को ऐनोड,शुद्ध धातु की प्लेट को कैथोड तथा धातु के किसी लवण के विलयन को वैद्युत अपघट्य रूप में लेकर विद्युत अपघटन किया जाता है। इस विधि द्वारा ऐलुमिनियम, कॉपर आदि का शोधन किया जाता है।


8. ताँबे के मलिन बरतन को नींबू या इमली के रस से क्यों साफ करते हैं?

उत्तर : ताँबे के बरतनों को आर्द्र वायु के संपर्क में छोड़ देने पर उसकी बाहरी सतह पर हरे-नीले रंग की क्षारकीय कॉपर कार्बोनेट [CuCO₃ . Cu(OH)₂] की एक परत बैठ जाती है। ताँबे के बरतन के ये लवण क्षारकीय होते हैं। अतः अम्लयुक्त नींबू या इमली के रस इन्हें घुला लेते हैं। अंदर का शुद्ध ताँबा इन्हें चमकीला बना देता है।


9. सोडियम, पोटैशियम और लीथियम को तेल के अंदर संग्रहित क्यों किया जाता है?

उत्तर:-सोडियम, पोटैशियम और लीथियम अत्यंत अभिक्रियाशील धातु हैं। ये नम वायु में उपचयित होकर अपनी चमक खो देते हैं। इनकी सतह पर धातु ऑक्साइड का आवरण बनता है जो नमी सोखकर हाइड्रॉक्साइड में और CO₂ सोखकर कार्बोनेट में परिवर्तित हो जाता है। इस प्रकार ये नष्ट हो सकते हैं। साथ ही, ये वायु में आग भी पकड़ सकते हैं। इसी कारण इन्हें तेल में डुबोकर रखा जाता है।


10. अत्यंत अभिक्रियाशील धातु होने के बावजूद ऐलुमिनियम का उपयोग खाना बनानेवाले बरतन के निर्माण में किया जाता है, क्यों?

उत्तर : ऐलुमिनियम वायु में उपचयित होकर अपनी सतह पर ऑक्साइड की एक परत बना लेता है। यह परत ऐलुमिनियम को आगे अभिक्रिया करने से रोक देती है, अर्थात इसे संक्षारण से बचाती है। ऐनोडीकरण द्वारा ऑक्साइड की परत को मोटा करके इसे संक्षारण से अधिक सुरक्षित एवं मजबूत बनाया जा सकता है। अतः, ऐलुमिनियम से बने बरतनों के प्रयोग में कोई कठिनाई नहीं होती है।


11. प्रायः आद्रे वायु में ताँबा (या पीतल) के बरतनों पर एक हरी-नीली परत जम जाती है, क्यों?


उत्तर: ताँबा पीतल का हो एक अवयव है। ताँबा या पीतल का बरतन आर्द्र वायु से अभिक्रिया कर हरे-नीले रंग का क्षारकीय कॉपर कार्बोनेट [CuCO₃ Cu(OH)₂] बनाते हैं जो उनकी सतह पर एक परत के रूप में जम जाता है।

2Cu + H₂O + CO₂ + O₂ → CuCO₃ . Cu(OH)₂

                                                    हरा-नीला रंग

यही कारण है कि ताँबा या पीतल के बरतनों को आर्द्र वायु में कुछ दिन छोड देने पर उसकी सतह पर हरी-नीली परत जम जाती है।

12. (i) इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण द्वारा Na₂O और MgO का निर्माण दर्शाएँ।

(ii) इन यौगिकों में कौन-से आयन उपस्थित हैं?

उत्तर:


(ii) Na₂O में Na⁺ एवं O²⁻ आयन उपस्थित हैं।

MgO में Mg²⁺ एवं O²⁻ आयन उपस्थित हैं।


13. लोहे के एक चाकू को नीले कॉपर सल्फेट विलयन में डुबोने पर नीला विलयन हलका हरा में बदल जाता है, क्यों?

उत्तर : लोहा ताँबा की अपेक्षा अधिक अभिक्रियाशील होता है। अतः,लोहे के चाकू को नीले कॉपर सल्फेट विलयन में डालने पर आइरन(घ्घ) सल्फेट बनता है तथा विलयन से ताँबा विस्थापित हो जाता है। आइरन(घ्घ) सल्फेट (फेरस सल्फेट) बनने के कारण विलयन का नीला रंग हल्का हरा हो जाता है।

Fe(s) + CuSO₄(aq) → FeSO₄ (aq) + Cu(s)

                   नीला हलका हरा


14. जिंक को आयरन (II) सल्फेट के विलयन में डालने से क्या होगा? इसकी रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।

उत्तर : जस्ता लोहा की अपेक्षा अधिक अभिक्रियाशील धातु है। अतः जस्ता को आइरन (II) सल्फेट विलयन में डालने पर जिंक सल्फेट बनता है तथा विलयन से लोहा विस्थापित हो जाता है। फलतः, विलयन का हरा रंग विलुप्त हो जाता है।

          Zn(s) + FeSO₄(aq)→ ZnSO₄(aq) + Fe(s)

                              हरा रंगहीन


15. लोहे पर जंग लगने की घटना किस प्रकार होती है?

उत्तर : लोहे का संक्षारण हवा एवं नमी की उपस्थिति में होता है। इससे लोहे की सतह पर फेरिक ऑक्साइड (Fe₂O₃) एवं फेरिक हाइड्रॉक्साइड [Fe(OH)₃] की भूरे रंग की ढीली परत बैठ जाती है। यह क्रिया लोहे में जंग लगने की क्रिया है जो एक उपचयन अभिक्रिया है।

4Fe + 3O₂ + 3H₂O → Fe₂O₃ + 2Fe(OH)₃

लोहे पर जंग प्रधानतः जलयुक्त फेरिक ऑक्साइड (Fe₂O₃ . xH₂O) बनने के कारण लगता है।


16. लोहे को जंग लगने से किस प्रकार बचाया जाता है?

उत्तर : लोहे को जंग लगने से बचाने के लिए,

(i) लोहे की सतह पर रंग या वार्निश चढ़ाया जाता है।

(ii) लोहा को तेल अथवा ग्रीज लगाकर रखना पड़ता है।

(iii) लौह धातु पर जस्ता धातु की परत बैठाई जाती है, जिसे जस्तीकरण कहते हैं।

17. आयनिक यौगिकों का गलनांक उच्च क्यों होता है?

उत्तर : आयनिक यौगिक धन एवं ऋण आवेश युक्त आयनों से बने होते हैं तथा ये आयन स्थिर वैद्युत आकर्षण बल द्वारा एक दूसरे से काफी मजबूती से बंधे रहते हैं। इस आकर्षण बल को कम करने के लिए अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि आयनिक यौगिकों का गलनांक उच्च होता है।


18. सक्रियता श्रेणी किसे कहते हैं? हाइड्रोजन एक अधातु है फिर भी उसे सक्रियता श्रेणी में जगह दिया गया है, क्यों?

उत्तर : सक्रियता श्रेणी धातुओं की वह सूची है जिसमें धातुओं की क्रियाशीलता को अवरोही क्रम में सजाया गया है। धातुओं की तरह हाइड्रोजन भी इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है तथा धनात्मक आयन बनाता है। इसलिए, हाइड्रोजन की सक्रियता श्रेणी में जगह दी गयी है।


19. सक्रियता श्रेणी में नीचे आने वाली धातु-ताँबा का निष्कर्षण कैसे किया जाता है?

उत्तर : सक्रियता श्रेणी में नीचे आने वाली धातु जैसे, ताँबा सल्फाइड के रूप में भी पायी जाती हैं, जिन्हें सिफ उच्च ताप पर गर्म करके धातु प्राप्त किया जाता है।

ताँबा- 2CuS + 3O₂ ___तापन→2Cu₂O + 2SO₂


2Cu₂S + Cu₂S ____तापन→ 6Cu + SO₂


20. धातु के निष्कर्षण प्रक्रम में कार्बोनेट एवं सल्फाइड अयस्क को ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है। कारण बताएँ।

उत्तर : सक्रियता श्रेणी के मध्य में स्थित धातुएँ (जैसे-Fe, Zn, Cu,आदि) प्रकृति में प्रायः कार्बोनट या सल्फाइड के रूप में पाई जाती हैं। धातुओंको उनके ऑक्साइड से प्राप्त करना उनके कार्बोनट या सल्फाइड से प्राप्त करने की तुलना में अधिक आसान होता है। इसलिए अपचयन से पहले धातु के कार्बोनेट या सल्फाइड को धातु ऑक्साइड में परिवर्तित करना आवश्यक है।


21. किसी धातु M के वैद्युत अपघटनी परिष्करण में आप ऐनोड, कैथोड एवं वैद्युत अपघट्य किसे बनाएँगे?

उत्तर : धातु M के वैद्युत अपघटनी शोधन में अशुद्ध धातु को ऐनोड, शुद्ध धातु की प्लेट को कैथोड तथा धातु के किसी लवण के विलयन को वैद्युत अपघट्य रूप में लेकर विद्युत अपघटन किया जाता है। इस विधि द्वारा ऐलुमिनियम, कॉपर आदि का शोधन किया जाता है।


22. ताँबा के एक अयस्क का नाम एवं सूत्र लिखिए। ताँबा धातु के निष्कर्षण का समीकरण लिखिए।

उत्तर : अयस्क-कॉपर ग्लांस; सूत्र-Cu₂S निष्कर्षण का समीकरण-

2Cu₂S + 3O₂→ 2Cu₂O + 2SO₂

2Cu₂O + Cu₂S → 6Cu + SO₂


23. मिश्रधातु किसे कहते हैं? दो मिश्रधातुओं के नाम एवं उपयोग लिखें।

उत्तर : दो या दो से अधिक धातुओं अथवा धातु एवं अधातु के समांग मिश्रण को मिश्रधातु कहते हैं। दो मिश्रधातुएँ निम्नांकित हैं।

(i) पीतल―यह ताँबा (Cu) एवं जिंक (Zn) की मिश्रधातु है।

इससे घरेलू बरतन एवं यंत्रों के पास बनाए जाते हैं।


(ii) काँसा―यह ताँबा (Cu) एवं टिन (Sn) की मिश्रधातु है।

इससे घरेलू बरतन, मूर्तियाँ आदि बनाए जाते हैं।


24. ऐलुमिनियम अत्यंत अभिक्रियाशील धातु है, फिर भी इसका उपयोग खाना बनाने वाले बरतन बनाने के लिए किया जाता है। कारण बताएँ।

उत्तर : ऐलुमिनियम ऊष्मा का अच्छा चालक है। इसका संक्षारण भी नहीं के बराबर होता है। यह एक मजबूत और सस्ती धातु है। इसलिए इसका उपयोग खाना बनाने वाले बर्तन बनाने में किया जाता है।


25. गर्म जल का टैंक बनाने में ताँबे का उपयोग होता है परंतु इस्पात का नहीं। क्यों?

उत्तर : ताँबा जल के साथ किसी भी स्थिति में अभिक्रिया नहीं करती है।लेकिन लोहा भाप के साथ अभिक्रिया कर ऑक्साइड एवं हाइड्रोजन गैस बनाती है। इसलिए गर्म जल का टैंक बनाने में ताँबे का उपयोग होता है लेकिन लोहा अर्थात् इस्पात का उपयोग नहीं किया जाता है।


26. निम्नांकित में विद्युत संयोजक एवं सहसंयोजक यौगिकों का चयन करें।ग्लूकोस, पोटैशियम क्लोराइड, एथीन, सोडियम ब्रोमाइड

उत्तर : विद्युत संयोजक यौगिक―पोटैशियम क्लोराइड, सोडियम ब्रोमाइड सहसंयोजक यौगिक―ग्लूकोस, एथीन


27. धातुएँ अम्ल के साथ किस प्रकार प्रतिक्रिया करती हैं?

उत्तर : धातुएँ अम्ल के साथ प्रतिक्रिया कर लवण तथा हाइड्रोजन गैस बनाती हैं।

                Zn + H₂SO₄ → ZnSO₄ + H₂


28. दो धातुओं के नाम बताइए जो तनु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देंगे तथा दो धातुएँ जो ऐसा नहीं कर सकती हैं।

उत्तर : हाइड्रोजन को तनु अम्ल से विस्थापित करने वाली धातुएँ- मैग्नीशियम, जिंका हाइड्रोजन को तनु अम्ल से विस्थापित नहीं करने वाली धातुएँ-कॉपर,सोना।


29. आयनिक यौगिकों के महत्त्वपूर्ण गुण बताइए।

उत्तर : (i) आयनिक यौगिक ठोस एवं कठोर होते हैं। 

(ii) आयनिक यौगिकों के गलनांक एवं क्वथनांक काफी उच्च होते हैं। 

(iii) आयनिक यौगिक जल में घुलनशील तथा किरोसीन, पेट्रोल में अघुलनशील है। 

(iv) आयनिक यौगिकों का जलीय विलयन विद्युत का सुचालक होता है।



30. ऐनोडीकरण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर : ऐलुमिनियम को वायु के संपर्क में लाने पर उसकी सतह पर ऑक्साइड की एक पतली परत का निर्माण हो जाता है जो उसे संक्षारण से बचाती है। ऑक्साइड की परत को मोटा करके इसे संक्षारण से अधिक सुरक्षित किया जा सकता है। इसके लिए ऐलुमिनियम की एक साफ वस्तु को ऐनोड बनाकर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल का विद्युत अपघटन किया जाता है। ऐनोड पर

मुक्त ऑक्सीजन गैस ऐलुमिनियम के साथ अभिक्रिया करके इसकी सतह पर ऑक्साइड की एक मोटी परत बनाती है। इस प्रक्रिया को ऐनोडीकरण कहते हैं।


31. दिल्ली के कुतुबमीनार के निकट स्थित 2000 वर्ष पुराना लौह-स्तंभ जंग से मुक्त क्यों है? कोई दो कारण दें।

उत्तर : (i) यह लौह-स्तंभ पिटवाँ लोहा से बना है जो संक्षारणरोधी होता है।

(ii) उसकी बाहरी सतह पर लोहे के चुंबकीय ऑक्साइड की एक परत जमी है,जो संक्षारण को रोकती है।


32. सोडियम परमाणु जल से तीव्रता से अभिक्रिया करता है, किंतु सोडियम आयन नहीं। क्यों? 

उत्तर : सोडियम अभिक्रियाशील होता है जबकि सोडियम आयन की बाह्यतम कक्षा में अष्टकपूर्ण (2, 6, स्थायी संरचना) हो जाने के कारण यह निष्क्रिय हो जाता है। इसी कारण से सोडियम जल के साथ तीव्रता से अभिक्रिया करता है, किंतु सोडियम आयन नहीं।


33. निम्नांकित में विद्युत संयोजक एवं सहसंयोजक यौगिकों का चयन करें। ग्लूकोस, पोटैशियम क्लोराइड, एथीन, सोडियम ब्रोमाइड

उत्तर : विद्युत संयोजक यौगिक-पोटैशियम क्लोराइड, सोडियम ब्रोमाइड। सहसंयोजक यौगिक-ग्लूकोस, एथीन।


34. सोने से मिश्रधातु कैसे तैयार की जाती है?

उत्तर : शुद्ध सोना 24 कैरेट का होता है। यह मुलायम धातु है। इसमें चाँदी या ताँबा मिलाकर मिश्रधातु तैयार की जाती है जो कठोर होती है। आमतौर पर भारतवर्ष में आभूषण तैयार करने के काम आनेवाली सोने की मिश्रधातु 22-कैरेट सोना होती है। 22-कैरेट सोना बनाने के लिए 22 भाग शुद्ध सोने में 2 भाग चाँदी अथवा ताँबा मिलाकर मिश्रधातु तैयार की जाती है।


35. सोना, चाँदी और प्लैटिनम के आभूषण बनाए जाते हैं। कारण बताएँ।

उत्तर : सोना, चाँदी और प्लैटिनम अत्यंत कम अभिक्रियाशील चमकीली धातु है। सामान्य ताप पर वायु और जलवाष्प से इनका संक्षारण प्रायः नहीं होता है। अतः, ये अपनी चमक बनाए रखते हैं और इसलिए आभूषण बनाने के लिए उपयुक्त धातु हैं।


                             5 अंक स्तरीय प्रश्न

1. (a) लौह-चूर्ण पर तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डालने से क्या होता है।

(b) हाइड्रोजन सल्फाइड गैस का वायु में दहन होने से जल एवं सल्फर डाइऑक्साइड बनता है। संतुलित रासायनिक समीकरण दीजिए।

(c) बेकिंग सोडा का रासायनिक नाम क्या है?

(d) टमाटर में कौन-सा अम्ल उपस्थित रहता है?

(e) क्यों हाइड्रोजन आयन को H₃O⁺ के रूप में दर्शाया जाता है। 

            [JAC 2012 (A)]

उत्तर : (a) Fe + 2HCl → FeCl₂ + H₂

लौह-चूर्ण पर तनु HCI डालने पर हाइड्रोजन गैस बनता है एवं लौह क्लोराइड बनता है।

(b) 2H₂S + 3O₂ → 2H₂O + 2SO₂

(c) बेकिंग सोडा का रासायनिक नाम सोडियम बाइकार्बोनेट है।

(d) टमाटर में ऐसीटिक अम्ल (CH₅ COOH) होता है।

(e) आयनों की सांद्रता बढ़ाने पर उस विलयन का pH मान बढ़ता है।                


3. (a) एक ऐसी धातु का नाम लिखिए जो हथेली पर रखने से पिघलने लगती है।

(b) दो उभयधर्मी ऑक्साइडों के नाम लिखिए।

(c) आयनिक यौगिक अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते हैं परन्तु गलित अवस्था में या जलीय विलयन के रूप में विद्युत का चालन करते हैं। इसके पीछे क्या वैज्ञानिक कारण है?

                                                    [JAC 2011 (A)]

उत्तर : (a) सिसियम (Cesium)


(b) एलुमिनियम ऑक्साइड (AI₂O₃), जिंक ऑक्साइड (ZnO)


(c) ठोस अवस्था में आयनिक यौगिकों के आयन निश्चित स्थानों पर बँधे रहते हैं और ये एक स्थान से दूसरे स्थान में गमन नहीं कर सकते। अतः ठोस की अवस्था में ये यौगिक विद्युत का चालक नहीं होते हैं। परन्तु पिघली हुई अवस्था में या जलीय विलयन में इनके आयन मुकत रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान में गमन कर सकते हैं। अर्थात् इन अवस्थाओं में ये विद्युत के सुचालक हो जाते हैं।


4. धातुओं के किन्हीं तीन रासायनिक गुणों का उल्लेख करें।

उत्तर : धातु के रासायनिक गुण-

(i) ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया : सोडियम एवं पोटैशियम कमरे के तापक्रम पर ही अपने ऑक्साइड बना लेते हैं।

4Na + O₂ → 2Na₂O

4K + O₂ → 2K₂O


(ii) जल के साथ प्रतिक्रिया : सोडियम, पोटैशियम तथा कैल्शियम जल के साथ सामान्य तापक्रम पर ही जल के साथ प्रतिक्रिया करते हैं और हाइड्रॉक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस बनाते हैं।

2Na +2H₂O → 2NaOH + H₂↑

2K + 2H₂O → 2KOH + H₂↑

Ca + 2H₂O → Ca(OH)₂ + H₂↑


(iii) अम्ल के साथ प्रतिक्रिया : Na तनु HCI से प्रतिक्रिया करते हैं।

2Na +2HCI → 2NaCl + H2↑


5. अधातुओं के किन्हीं तीन रासायनिक गुणों का उल्लेख करें।

उत्तर : अधातुओं के रासायनिक गुण―

(i) ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया : अधातुएँ ऑक्सीजन के साथ संयोग करके अम्लीय ऑक्साइड बनाते हैं जो जल में घुलकर अम्ल बनाते हैं। जैसे-

              C + O₂ → CO₂


(ii) अम्लों के साथ प्रतिक्रिया : सल्फर सान्द्र नाइट्रिक अम्ल से

प्रतिक्रिया करके सल्फ्यूरिक अम्ल बनाता है।

          S + 6HNO₃ → H₂SO₄ +6NO₂ + 2H₂O


(iii) क्लोरीन के साथ प्रतिक्रिया : अधातु क्लोरीन के साथ प्रतिक्रिया करके क्लोराइड बनाते हैं। जैसे-

                         P₄ +6Cl₂ → 4PCl₃

                         H₂ + Cl₂ → 2HCI



6. जस्ता के दो मुख्य अयस्कों के नाम लिखें। इनसे जस्ता के निष्कर्षण की विधि का सिद्धांत बताएँ।

उत्तर : जस्ता के मुख्य दो अयस्क हैं―

(i) जिंक ब्लेंड (ZnS) और (ii) कैलामाइन (ZnCO₃)।

जस्ता के निष्कर्षण का सिद्धांत ―जस्ता के अयस्क को पहले सांद्रित कर लिया जाता है। सांद्रित सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में जारित कर उसे ऑक्साइड में परिवर्तित कर लिया जाता है। सांद्रित कार्बोनेट अयस्कों को वायु की सीमित मात्रा में निस्तापित कर ऑक्साइड में परिवर्तित कर लिया जाता है।

2ZnS (s) + 3O₂ (g) ___Δ/जारण→ 2ZnO (s) + 2502(g)


ZnCO₃ (s) ____Δ/निस्तापन→ ZnO (s) + CO2(s)


जिंक ऑक्साइड को कार्बन के साथ उच्च ताप (1673K) पर गर्म करने पर ऑक्साइड धातु में अपचयित हो जाता है।

ZnO (s) + C (s) ____Δ→ Zn (s) + CO(g)


7. दिए गए चित्र में धातुओं में चालक का गुण प्रकट करने के लिए किए गए प्रयोग दिखाया गया है। [1], [2], [3], [4) एवं [5] का नामांकन कीजिए। [JAC 2009 (S)]


उत्तर : [1] धातु का छड़ 

[2] छड़ का खुला सिरा

[3] मोम

[4] पिन

[5] बर्नर


8. किसी धातु की तनु H₂ SO₄ अम्ल से क्रिया करायी जाती है। उत्सर्जित गैस को चित्र में दिखाई विधि से एकत्र किया जाता है। निम्नलिखित के उत्तर दीजिए―


(i) गैस का नाम बताइए।

(ii) गैस को एकत्र करने की विधि का नाम बताइए।

(iii) क्या गैस जल में विलेय है अथवा नहीं?

(iv) क्या गैस वायु से हल्की है अथवा भारी?

(v) गैस का रासायनिक सूत्र लिखें। [JAC 2010 (A)]

उत्तर : (i) H₂ गैस

(ii) अधोविस्थापन विधि

(iii) हाँ, विलेय

(iv) हल्की

(v) H₂


9. दिए गए चित्र में धातु की जल के भाप के साथ अभिक्रिया को दर्शाया गया है। [1], [2], [3], [4] एवं [5] का नामांकन कीजिए।


उत्तर : [1] धातु 

[2] बर्नर

[3] नाद

[4] सेतु

[5] H₂ गैस


10. दिए गए चित्र में लवण के विलयन की चालकता का प्रयोग दिखाया गया है। [1],[2], [3]. [4] एवं [5] का नामांकन कीजिए। [JAC2019(A)]


उत्तर : [1] बल्ब

[2] स्विच

[3] ग्रेफाइट का छड़ 

[4] बीकर

[5] लवण का विलयन


11. दिए गए चित्र में ताँबे के विद्युत अपघटनी परिष्करण को दिखाया गया है। [11.121. 131,14) एवं (5) का नामांकन कीजिए।

                                       [JAC 2009 (A),2017(A)]


उत्तर : [1] कैथोड

[2] ऐनोड

[3] अम्लीय CuSO₄ विलयन 

[4] अपद्रव्य

[5] Cu²⁺


12.(a) थर्मिट अभिक्रिया का (i) रासायनिक समीकरण तथा (ii) एक उपयोग लिखिए।

(b) संक्षारण के लिए आवश्यक शर्ते क्या हैं? 

                                                  [JAC 2015 (A)]

उत्तर : (a) (i) जब आयरन (III) ऑक्साइड तथा ऐलुमिनियम पाउडर (थर्माइट) के मिश्रण को आग लगायी जाती है तो एक बहुत प्रबल अभिक्रिया प्रारंभ हो जाती है। इससे आयरन धातु तथा ऐलुमिनियम ऑक्साइड बनता है।

यह अभिक्रिया थर्मिट अभिक्रिया कहलाती है।

Fe₂O₃ + 2AI → 2Fe + AI₂O₃ + अत्यधिक ऊष्मा


(b) हवा में वर्तमान ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प,सल्फर डाइऑक्साइड आदि की प्रतिक्रिया धातु की सतह पर होनेवाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं के कारण होनेवाले धातु के क्षरण की क्रिया को संक्षारण कहते है।



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5. विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव

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             4. विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव




1. विद्युत धारा उत्पन्न करने की युक्ति को क्या कहते हैं?                                                            [JAC 2014(A)]

उत्तर : जनित्र।


2. विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में किस युक्ति द्वारा परिणत किया जाता है?

                                                          [JAC 2015 (A)]

उत्तर : विद्युत मोटर।


3. विद्युत चुम्बक क्या है? [JAC 2016 (A)]

उत्तर : विद्युत धारा के प्रवाह से बने चुम्बकीय पदार्थ विद्युत चुम्बक है।


4. विद्युत मोटर किस ऊर्जा को किस ऊर्जा में रूपान्तरित करता है।

                                  [JAC 2009 (S),2010(S)]

उत्तर : विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में।


5. उस नियम का नाम लिखें जिसकी मदद से धारावाही चालक पर चुंबकीय क्षेत्र में लगने वाला बल की दिशा ज्ञात करते हैं।                                        [JAC 2009 (A)]

उत्तर : फ्लेमिंग का वामहस्त नियम।


6. विद्युत परिपथों तथा साधित्रों में सामान्यतः उपयोग होनेवाले दो सुरक्षा उपायों के नाम लिखिए। [JAC 2010 (A)]

उत्तर : (i) भू-संपर्क तार (ii) विद्युत फ्यूज।


7. किसी चुंबकीय क्षेत्र में स्थित विद्युत धारावाही चालक पर आरोपित बल कब अधिकतम होता है?

उत्तर : लम्बवत्।


8. किसी विद्युत परिपथ में लघुपथन कब होता है?

उत्तर : जब विद्युतन्य एवं उदासीन तार आपस में संपर्क में आ जाते हैं।


9. एक युक्ति का नाम बताएँ जो विद्युत चुम्बकीय प्रेरण की घटना पर कार्य करती है।

उत्तर : जनित्र।


10. दिष्टधारा के कुछ स्रोतों के नाम लिखिए।

उत्तर : शुष्क सेल, बटन सेल, लेड बैटरियाँ आदि।


11. विद्युत परिपथों तथा साधित्रों में सामान्यत: उपयोग होने वाले एक सुरक्षा उपाय का नाम लिखिए।

उत्तर : फ्यूज।


12. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ चुंबक के किस ध्रुव से प्रकट होती है?

उत्तर : उत्तरी ध्रुव से


13. प्रत्यावर्ती जनित्र के सिद्धान्त का नाम बताएँ।

उत्तर : विद्युत-चुम्बकीय प्रेरण।


14. क्या दो चुंबकीय क्षेत्र-रेखाएँ एक-दूसरे को काट सकती हैं?

उत्तर : नहीं


15. गॉस (G) एवं टेसला (T) दोनों चुंबकीय क्षेत्र के मात्रक हैं। इनमें क्या संबंध है?

उत्तर :1T = 10⁴ G.


16. विद्युत मोटर में विभक्त वलय (split ring) की क्या भूमिका है?

उत्तर : विद्युत मोटर में विभक्त वलय का कार्य है विद्युत-धारा की दिशा को उत्क्रमित करना।


17. विद्युत मोटर का क्या सिद्धांत है?

उत्तर : विद्युत मोटर का सिद्धांत है किसी चुंबकीय क्षेत्र में रखे किसी धारावाही चालक पर एक बल का लगना।


18. प्रत्यावर्ती धारा उत्पन्न करनेवाले एक स्रोत का नाम लिखिए।

उत्तर : प्रत्यावर्ती-धारा जनित्र।


19. दक्षिण हस्त अंगुष्ट नियम में अँगुठे द्वारा किसकी दिशा संकेतित होती है?

उत्तर : धारा की दिशा।


20. घरों में प्रयोग होने वाले उपकरण मेंस से किस प्रकार जोड़ते हैं?

उत्तर : समानान्तर क्रम में।


21. फ्यूज तार को विद्युत परिपथ में किस क्रम में जोड़ा जाता है?

उत्तर : श्रेणीक्रम में।


22. लघुपथन के समय परिपथ में विद्युत धारा के मान में क्या परिवर्तन होता है?

उत्तर : बहुत अधिक बढ़ जाता है।


23. उस नियम का नाम लिखिए जिससे किसी चालक में प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात की जाती है।

उत्तर : दक्षिणहस्त नियम।


24. फ्लेमिंग के वाम हस्त नियम से धारा, बल एवं क्षेत्र में से किसकी दिशा अंगूठे द्वारा संकेतित होती है?

उत्तर : बल की दिशा (गति की दिशा)।


25. घरेलू कार्यों के लिए व्यवहार की जानेवाली बिजली क्या है?

उत्तर : मेन लाइन पावर। इसे 220 V, 50 Hz कहते हैं।

  

26. क्रोड किसे कहा जाता है?

उत्तर : परिनालिका जिस पदार्थ पर लिपटी होती है, उसे क्रोड कहा जाता है।

                    3 अंक स्तरीय प्रश्न


1. किसी छड़ चुंबक के चारों ओर चुंबकीय रेखाएँ खींचिए।

उत्तर: 


2. परिनालिका का स्वच्छ नामांकित चित्र बनाइए।

उत्तर:


3. चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के तीन गुणों को लिखिए।

                                           [JAC 2019 (A)]

उत्तर : (i) ये बल रेखाएँ बन्द वक्र होते हैं।

 (ii) जहाँ पर क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे के निकट रहती है वहाँ चुम्बकीय क्षेत्र अधिक प्रबल होता है। 

(iii) दो क्षेत्र रेखाएँ कभी भी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करती हैं।

4. चुम्बकीय क्षेत्र रेखा किसे कहते हैं? दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद क्यों नहीं करतीं।

उत्तर : चुंबक के चारों ओर स्थित वह रेखा जिसके अन्दर आकर्षण एवं विकर्षण बल का प्रभाव प्रदर्शित होता है उसे चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कहते हैं।किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र रेखा की दिशा उस बिन्दु पर खींची गई स्पर्श रेखा द्वारा प्राप्त की जाती है। यदि दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ परस्पर किसी एक बिन्दु पर प्रतिच्छेद करती है तो उस बिन्दु पर दो अलग दिशा प्राप्त होती है जो संभव नहीं है।

5. फ्लेमिंग के वाम-हस्त एवं दक्षिण-हस्त नियम को लिखिए।                                       [JAC 2020 (A)]

उत्तर : वाम-हस्त नियम : यदि बाएँ हाथ के अंगूठा, तर्जनी एवं मध्यमा को एक-दूसरे से परस्पर लम्बवत् फैलाया जाए और मध्यमा से धारा की दिशा एवं तर्जनी से चुंबकीय क्षेत्र की दिशा निरूपित हो तो अंगूठा बल की दिशा को निरूपित करता है।


दक्षिण-हस्त नियम : दाहिने हाथ की तर्जनी, मध्यमा अंगूली तथा अंगूठे को ऐसा फैलाएँ कि तीनों एक दूसरे के लंबवत् हो तब यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा की ओर संकेत करती है तथा अंगूठा चालक की गति की दिशा की ओर संकेत करता है तो मध्यमा चालक में प्रेरित विद्युत धारा को दर्शाएगी।

6. विद्युत मोटर में विभक्त वलय की क्या भूमिका है?

उत्तर : विद्युत मोटर में विभक्त वलय एक दिक्परिवर्तक का कार्य करता है। कुण्डली के प्रत्येक आधे घूर्णन के बाद यह विभक्त वलय धारा की दिशा को पुनः वापस कर देती है तथा कुण्डली को एक समान रूप में घूर्णन के लिए प्रेरित करती है।


7. किसी कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित करने के विभिन्न ढंग स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : किसी कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित करने के विभिन्न ढंग―

(i) चुम्बक एवं कुण्डली के बीच आपेक्षिक गति उत्पन्न करके।

(ii) धारावाही चालक एवं कुण्डली के बीच आपेक्षिक गति उत्पन्न करके।

(iii) कुण्डली के समीप रखे चालक में धारा का मान बदलकर।


8. चुंबकीय क्षेत्र के तीन स्रोतों की सूची बनाइए।

उत्तर : चुंबकीय क्षेत्र की उत्पत्ति के तरीके इस प्रकार हैं-

(i) एक धारावाही तार में दिष्ट धारा भेजने पर इसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है।

(ii) एक धारावाही परिनालिका में दिष्ट धारा भेजने पर परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है।

(iii) एक चुंबकीय छड़ के आस-पास चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है।


9. दो वृत्ताकार कुंडलियाँ A तथा B एक-दूसरे के निकट रखी हैं। यदि कुंडली में विद्युत-धारा में कोई परिवर्तन किया जाए तो क्या कुंडली B में कोई विद्युत-धारा प्रेरित होगी? कारण दें।

उत्तर : हाँ, कुंडली B में विद्युत-धारा प्रेरित होगी।

कारण-जब कुंडली A में विद्युत-धारा के मान में परिवर्तन होगा तो इसके कारण कुंडली A में उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र में भी परिवर्तन होगा। A के चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन के प्रभाव से कुंडली B में विद्युत-धारा प्रेरित होगी।

10. कोई विद्युतरोधित ताँबे के तार की कुंडली किसी गैल्वेनोमीटर से जुड़ी है। क्या होगा यदि कोई छड़ चुंबक

(i) कुंडली में धकेला जाता है?

(ii) कुंडली के भीतर से बाहर खींचा जाता है?

(iii) कुंडली के भीतर स्थिर रखा जाता है?

उत्तर : स्थिति

 (i) में गैल्वेनोमीटर में किसी एक ओर विक्षेप होगा।

 (ii) में गैल्वेनोमीटर में स्थिति (i) के विपरीत दिशा में विक्षेप होगा।

 (iii) में गैल्वेनोमीटर में कोई विक्षेप नहीं होगा।


11. लघुपथन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर : यदि किसी परिपथ में भारन के समांतर धारावाही तार जुड़ जाते हैं,तो कम प्रतिरोध का पथ मिलने के कारण उच्च धारा प्रवाहित होने लगती है। इसके ऊष्मीय प्रभाव से आग भी लग सकती है। इस प्रकार कम प्रतिरोध के पथ मिलने को लघुपथन कहा जाता है।


12. किसी विद्युत परिपथ में लघुपथन कब होता है? [JAC 2019 (A)]

उत्तर : जब जीवित तार एवं उदासीन तार आपस में सम्पर्क में आ जाते हैं तो लघुपथन की घटना होती है। यह तभी होता है जब या तो तार का विद्युतरोधी नष्ट हो गया हो या विद्युत उपकरण में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी आ गई हो।


13. विद्युत चुंबक क्या है? एक परिनालिका एक चुंबक की भाँति कैसे व्यवहार करती है। [JAC 2020 (A)]

उत्तर : विद्युत चुंबक एक युक्ति है जो विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव के सिद्धांत पर कार्य करती है। धारावाही परिनालिका का एक सिरा उत्तर एवं दूसरा सिरा दक्षिण ध्रुव की तरह व्यवहार करता है। धारावाही परिनालिका के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ किसी छड़ चुंबक के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के समान होती हैं। परिनालिका के भीतर किसी छड़ चुंबक की तरह एकसमान चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न रहता है।


14. मैक्सवेल का दक्षिण हस्त अंगुष्ठ नियम बताएँ।

उत्तर : यदि हम धारावाही तार को अपने दाहिनी हाथ में इस प्रकार पकड़ें कि अँगूठा धारा की दिशा में तना रहे तो अँगुलियाँ चालक के चारों ओर चुंबकीयक्षेत्र रेखाओं की दिशा में लिपटी होंगी।


15. एक धारावाही परिनालिका द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति किन कारणों पर निर्भर करती है?

उत्तर : (i) परिनालिका के फेरों की संख्या,

 (ii) परिनालिका में प्रवाहित धारा की शक्ति,

(iii) परिनालिका के अन्दर स्थिर क्रोड की प्रकृति।


16. ऑस्टेड के प्रयोग का वर्णन कीजिए।

उत्तर : ऑस्टेड ने सबसे पहले विद्युत और चुम्बकत्व के परस्पर संबंध को प्रमाणित किया। उन्होंने प्रमाणित किया कि विद्युत धारा से चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो सकता है।

ऑस्टेड के प्रयोग के अनुसार एक लंबे कॉपर तार को एक दिक्सूचक के उत्तर-दक्षिण दिशा के समानान्तर रखने पर जैसे ही हम तार में धारा प्रवाहित करते हैं हम देखते हैं दिक्सूचक की सूई एक दिशा विशेष में विक्षेपित हो जाती है। दिक्सूचक की सूई का विक्षेपण यह दर्शाता है कि जब तार में विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो उसके आस-पास एक चुंबकीय क्षेत्र क्रियाकारी होता है।


17. विद्युत फ्यूज क्या है? इसे विद्युत परिपथ में किस तार द्वारा और किस क्रम में जोड़ा जाता है?

उत्तर : विद्युत फ्यूज सुरक्षा की एक युक्ति है। अतिभारण एवं लघुपथन से परिपथ की सुरक्षा के लिए इसका उपयोग किया जाता है। ताँबे तथा टिन अथवा शीशा एवं टिन के मिश्रधातु के तार का उपयोग किया जाता है।फ्यूज को गर्म तार के द्वारा श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।

18. भू-संपर्क तार का क्या कार्य है? धातु के आवरण वाले विद्युत साधित्रों को भू-संपर्कित करना क्यों आवश्यक है? [JAC 2010 (A)]

उत्तर : भू-संपर्क तार का संपर्क मेन फ्यूज से रहता है। फ्यूज होकर विद्युत उपकरणों तक पहुँचाया जाता है तथा वह वापस फ्यूज तक संपर्कित रहता है।

इसका मुख्य कार्य झटका से बचाने का होता है।धातु के आवरण वाले विद्युत साघित्रों को भू-संपर्कित किया जाता है। ऐसा नहीं करने पर कभी-कभी ऐसा देखा जाता है कि जब कोई व्यक्ति इन साघित्रों पर कार्य करता है तो तीव्र झटका का अनुभव करता है, क्योंकि किसी कारणवश यदि विद्युतरोधी नष्ट हो जाता है तो विद्युत धारा सीधे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता है। इसलिए ऐसी दुर्घटनाओं से बचने के लिए भू-संपर्क तार से संपति कर दिया जाता है ताकि धारा शरीर में प्रवेश न करके पृथ्वी में प्रवेश कर जाए क्योंकि पृथ्वी नगण्य रूप में प्रतिरोध पैदा करता है।


19. शॉर्ट सर्किट किसे कहते हैं? फ्यूज तार परिपथ में क्यों लगाये जाते हैं?

उत्तर : वह सर्किट जिसमें अचानक किसी कारण से धारा का प्राबल्य बढ़ जाय और परिपथ में लगी युक्तियाँ जल जायँ, उस सर्किट (परिपथ) को शॉर्ट सर्किट कहते हैं। फ्यूज तार सुरक्षा की एक युक्ति है। विद्युत परिपथों में अचानक धारा का मान अतिभारण और लघुपथन के कारणों से अत्यधिक बढ़ जाने से परिपथ में लगी युक्तियाँ जलकर नष्ट हो सकती हैं।

 ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए परिपथ में जहाँ-तहाँ फ्यूज श्रेणी में संयोजित किये जाते हैं। फ्यूज ऐसे पदार्थ के तार का टुकड़ा होता है जिसका गलनांक बहुत कम होता है। जब कभी धारा अत्यधिक बढ़ जाती है, तो सबसे पहले फ्यूज गर्म होकर गल जाता है और परिपथ टूट जाता है जिससे उसमें लगी युक्तियाँ यथा बल्ब, पंखे, हीटर आदि जलने से बच जाते हैं।


20. (a) प्रत्यावर्ती धारा उत्पन्न करने वाले एक स्रोत का नाम लिखिए।

(b) प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति क्या होती है?

(c) प्रत्यावर्ती धारा एवं दिष्ट धारा में एक मुख्य अंतर लिखिए। [JAC 2015 (A)]

उत्तर : (a) प्रत्यावर्ती धारा उत्पन्न करने वाले एक स्रोत का नाम प्रत्यावर्ती धारा जनित्र कहा जाता है।

(b) एक पूर्ण प्रत्यावर्तन को एक चक्र कहा जाता है और एक सेकेण्ड में होने वाले चक्रों की संख्या को प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति कहते हैं।

(c) प्रत्यावर्ती धारा एक निश्चित समयान्तराल के पश्चात् अपनी दिशा बदलती रहती है जबकि दिष्ट धारा सदैव एक ही दिशा में प्रवाहित होती है।


21. चित्र में फ्लेमिंग का वामहस्त नियम के लिए हाथ का आरेख दर्शाया गया है। चित्र में [1], [2] और [3] द्वारा किन-किन भौतिक राशियों का निरूपण होता है? [JAC 2013 (A)]


उत्तर : [1] धारा के प्रवाह

[2] चुंबकीय क्षेत्र

[3] चालक की गति।


22. 2kW शक्ति अनुमतांक का एक विद्युत तंदूर किसी घरेलू विद्युत परिपथ (220V) में प्रचालित किया जाता है जिसका विद्युत धारा अनुमतांक 5 A है। इससे आप किस परिणाम की अपेक्षा करते हैं? स्पष्ट कीजिए।

                                                        [JAC2010 (S)]

उत्तर : 2 kW शक्ति अनुमतांक का विद्युत तंदुर किसी घरेलु परिपथ (220 V) में प्रचालित करना गलता है। विद्युत तंदुर के लिए अत्यधिक वोल्ट (220 से ऊपर) की आवश्यकता है। 5A अनुमतांक घरेलु कार्यों में प्रयुक्त होता है। इस स्थिति में परिपथों में अपरिहार्य तापन, परिपथ के अवयवों के ताप में वृद्धि कर उसके गुण में परिवर्तन कर सकता है। अर्थात् परिपथ भंग होने अथवा सार्ट सर्किट की संभावना बढ़ जाएगी। 1kw के लिए 220V पर धारा प्रकरण में 5 A अनुमतांक का फ्यूज उपयुक्त है।


            5 अंक स्तरीय प्रश्न (विकल्प)


1. विद्युत मोटर क्या है ? इसका सिद्धांत लिखें तथा इसकी कार्यविधि सचित्र वर्णन करें। [JAC 2010 (A),2015 (A),2017(A), 2020 (A)]

उत्तर : विद्युत मोटर एक ऐसा यंत्र है जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है। विद्युत मोटर में एक शक्तिशाली चुंबक के अवतलाकार ध्रुव-खंडो के बीच ताँबे के तार की एक कुंडली ABCD होती है जिसे आर्मेचर कहते है।

आर्मेचर के दोनों छोर पीतल के विभक्त वलयों (splitrings)R₁ तथा R₂ से जुड़े होते हैं। इन वलयों को कार्बन ब्रश B₁ तथा B₂ छूते हैं।एक विद्युत मोटर का नामांकित चित्र इस प्रकार है


सिद्धांत―चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही (तार की) कुंडली पर एक क्षेत्र द्वारा बल-आघूर्ण लगाया जाता है। अत:, धारावाही कुंडली घूमने लगती है। इस घूर्णीं कुंडली से जुड़ी वस्तु भी घूमने लगती है। धारावाही तार पर बल की दिशा फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम से प्राप्त होती है।


क्रिया विधि―जब कुंडली से विद्युत-धारा प्रवाहित की जाती है तब चुंबक के चुंबकीय क्षेत्र के कारण आर्मेचर की AB तथा CD भुजाओं पर समान,किंतु विपरीत दिशा में बल लगते हैं जिस कारण आर्मेचर घूमने लगता है।


विभक्त वलय (R₁R₂) का महत्त्व―इसकी बनावट के कारण प्रत्येक चक्र के आधे में एक ध्रुव के पास चलते तार में धारा की दिशा समान रहती है जिससे एक ही दिशा में बल आघूर्ण लगता रहता है। इस प्रकार एक ही दिशा में घूर्णन विभक्त वलय के कारण संभव होता है।


2. विद्युत जनित्र (डायनेमो) क्या है? इसके क्रिया सिद्धांत और कार्यविधि का सचित्र वर्णन करें। [JAC 2009 (S), 2012 (A)]

उत्तर : विद्युत जनित्र का सिद्धांत― अगर चुंबकीय क्षेत्र में एक कुंडली को घुमाया जाए तो कुंडली में विद्युतवाहक बल प्रेरित होता है। परिपथ पूरा होने पर कुडली में विद्युत-धारा उत्पन्न होती है।

कार्यविधि― एक आयताकार कुंडली ABCD स्थायी चुंबक के ध्रुवों N एवं S के बीच एक मोटर की मदद से घुमाई जाती है। इस कुंडली के मुक्त सिरे दो चालक वलयों R₁ एवं R₂ को स्पर्श करते हुए घूमते हैं। R₁ एवं R₂ बशों B₁ एवं B₂ से जुड़े होते हैं जिनसे बाहरी परिपथ में विद्युत-धारा जाती है।


मान लें कि भुजा AB ऊपर तथा CD नीचे जा रही है। चुंबकीय क्षेत्र की दिशा N से S की ओर है। पलेमिंग के दाएँ हाथ के नियम से भुजाओं में प्रेरित धारा की दिशा मिलती है। आधे चक्कर के बाद CD ऊपर तथा AB नीचे जाते हैं जिसके कारण ABCD में धारा की दिशा विपरीत हो जाती है।

प्रत्यावर्ती धारा जनित्र― पूर्ण वलयों R₁ एवं R₂ के कारण बाह्य परिपथ में भी धारा प्रत्येक आधे चक्कर बाद उलट जाती है। अतः, बाह्य परिपथ में प्रत्यावर्ती धारा प्राप्त होती है। इस व्यवस्था को प्रत्यावर्ती जनित्र कहा जाता है।

दिष्ट धारा जनित्र― दो वलयों R₁ एवं R₂ के बजाए एक विभक्त वलय की मदद से बाहरी परिपथ में दिष्ट धारा प्राप्त की जा सकती है। इस व्यवस्था में एक बश सदैव उस भुजा के सम्पर्क में रहता है जिसकी गति ऊपर होती है तथा दुसरा ब्रश सदैव उस भुजा के संपर्क में रहता है जिसकी गति नीचे होती है।

अत:. दोनों ब्रशों की ध्रुवता अचर हो जाती है और ब्रशों से जुड़े बाहरी परिपथ में दिष्ट धारा जाती है। इस व्यवस्था को दिष्ट धारा जनित्र या डायनेमो कहा जाता है।


3. दिष्टधारा डायनेमो की बनावट और कार्य सिद्धान्त का सचित्र वर्णन करें।

                                   [JAC 2010 (S), 2011 (A)]

उत्तर : ऐसा डायनेमो जिससे दिष्टधारा प्राप्त होती है डी.सी. डायनेमो कहलाता है। दिष्टधारा डायनेमो की बनावट लगभग प्रत्यावर्ती धारा डायनेमो के समान ही होती है लेकिन अंतर सिर्फ इतना ही होता है कि आर्मेचर के छोरों पर एक ही वलय के आधे-आधे भाग अलग-अलग ढँके रहते हैं


आधे घूर्णन के समय R₁ खंड धनात्मक ध्रुव होता है तब B₁ ब्रश इसके संपर्क में रहता है। घूर्णन क्रम में जब R₁ ऋणात्मक बन जाता है तो इसका संपर्क B₂ ब्रश से हो जाता है तथा ब्रश B₁ का संपर्क R₁ खंड से हो जाता है। इस तरह ब्रश B₁ धनात्मक तथा ब्रश B₂ ऋणात्मक विभव पर बने रहते हैं। ऐसा रहने पर

आर्मेचर की धारा की दिशा बदलने पर भी बाह्य परिपथ में धारा की दिशा हमेशा एक ही दिशा में रहती है जो शून्य से अधिकतम मान के बीच बदलता है। अतःऐसे डायनेमो से दिष्टधारा (डी०सी०) प्राप्त होती है


4. विद्युत चुंबकीय प्रेरण किसे कहते हैं? इसे दिखाने के लिए एक प्रयोग का वर्णन कीजिए। [JAC 2009 (A),2014(A)]

उत्तर : यदि किसी चुम्बक को बन्द कुण्डली के समीप लाया जाता है या उस चुम्बक को उस कुण्डली से दूर ले जाया जाता है तो दोनों ही स्थितियों में कुण्डली में धारा प्रवाहित होती है। यह धारा तब तक प्रवाहित होती है जब तक चुम्बक गतिशील रहता है। इस प्रकार चालक में विद्युत वाहक बल और विद्युत धारा प्रेरित होती है जिसे क्रमशः प्रेरित विद्युत वाहक बल तथा प्रेरित विद्युत धारा कहते हैं एवं यह घटना विद्युत-चुम्बकीय प्रेरण कहलाती है।

        इसे प्रदर्शित करने के लिए सर्वप्रथम एक काठ का खोखला बेलन लिया जाता है। इस बेलन के ऊपर अनेक फेरोंवाली तार की एक कुण्डली AB लपेट दी जाती है। इसके बाद एक सुग्राही गैल्वेनोमीटर को चित्रानुसार जोड़ दिया जाता है।


अब एक छड़ चुम्बक लेकर उसे कुण्डली के समीप तेजी से लाया जाता है तो दिखता है कि गैल्वेनोमीटर की सूई एक खास दिशा में (माना दाहिनी ओर)विक्षेपित हो जाती है। पुनः जब छड़ चुम्बक को कुण्डली से दूर ले जाया जाता है तो गैल्वेनोमीटर की सुई बाँयी ओर विक्षेपित हो जाती है। अर्थात् लाने के क्रम में चुम्बकीय क्षेत्र बढ़ता है तथा दूर ले जाने के क्रम में चुम्बकीय क्षेत्र घटता है। जब कुंडली और चुम्बक दोनों स्थिर होते हैं तो गैल्वेनोमीटर की सूई में किसी प्रकार का कोई विक्षेप नहीं देखा जाता है।

 इस प्रयोग से स्पष्ट है कि कुण्डली के सापेक्ष चुम्बक की गति से प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है फलस्वरूप परिपथ में प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न होती है। विद्युत वाहक बल के प्रेरण की यह घटना विद्युत-चुम्बकीय प्रेरण कहलाती है।


5. धारावाही चालक तार के इर्द-गिर्द चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। उसे दिखाने के लिए ओटैंड के प्रयोग का वर्णन करें।

उत्तर : इसके प्रदर्शन हेतु ऑर्टेड का प्रयोग इस प्रकार है― ताँबा के एक पतले विद्युतरोधित तार को इस प्रकार रखा जाता है कि तार AB खंड उत्तर-दक्षिण दिशा में रहे, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। तार के सिरों से एक बैटरी, एक स्विच और एक रियोस्टैट (धारा-नियंत्रक) श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है। तार AB के नीचे एक कीलकित चुंबकीय सूई रखी जाती है। 

जब स्विच खुला रखा जाता है तो तार में धारा प्रवाहित नहीं होती है और चुंबकीय सूई उत्तर-दक्षिण दिशा में पृथ्वी के चुंबकत्व के कारण स्थिर बनी रहती है, अर्थात सूई में कोई विक्षेप नहीं होता है। किंतु, जब स्विच बंद कर तार में धारा प्रवाहित की जाती है तब चुंबकीय सूई विक्षेपित हो जाती है, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। अतः, धारावाही तार के कारण चुबंकीय सूई का विक्षेप (विचलन) यह दिखाता है कि विद्युत-धारा अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है।

इससे स्पष्ट होता है कि गतिमान आवेश न केवल वैद्युत क्षेत्र बल्कि एक चुंबकीय क्षेत्र भी उत्पन्न करता है। इस चुंबकीय क्षेत्र में स्थित सूई विक्षेपित होती है।


6. प्रत्यावर्ती धारा किसे कहते हैं? प्रत्यावर्ती धारा से होनेवाले लाभ एवं हानि का उल्लेख करें।

उत्तर : वैसी विद्युत धारा जिसकी दिशा खास समय अन्तराल में बदलती रहती है, प्रत्यावर्ती धारा कहलाती है।

प्रत्यावर्ती धारा से लाभ―

(a) ट्रांसफॉर्मर की सहायता से इसका विद्युत वाहक बल बढ़ाया या घटाया जा सकता है। इस क्रिया में विद्युत ऊर्जा का क्षय नगण्य है।

(b) इस धारा के विद्युत वाहक बल को कम करके 6 वोल्ट की बत्ती भी जलायी जा सकती है।

प्रत्यावर्ती धारा से हानियाँ―

(a) प्रत्यावर्ती धारा से विद्युत लेपन तथा बैटरियों का आवेशन नहीं किया जा सकता है।

(b) प्रत्यावर्ती धारा को संचायक सेल में संचित नहीं किया जा सकता है।



7. घरेलू परिपथ के एक नमूना को आरेखित कर समझाएँ।

उत्तर : घरेलू वायरिंग में तीन तार- -जीवित तार अथवा गर्म तार L (प्रायः लाल रंग का), उदासीन तार या ठंडा तार N (प्रायः काले रंग का) और भू-तार E (प्रायः हरे रंग का) के समूह का उपयोग होता है। ये तीनों तार प्लास्टिक के खोल के अन्दर रखे रहते हैं। प्रभावतः स्रोत से प्रत्यावर्ती धारा जीवित तार (L) से प्रवाहित होती हुई उदासीन तार (N) से लौटती हुई मानी जाती है। भू-तार (E) जमीन के अन्दर लगभग पाँच मीटर नीचे गड़ी धातु की प्लेट से जुड़ा रहता है। 


प्लेट से जुड़ा रहता है। 15A और 5A के परिपथ अलग-अलग बनाए जाते हैं।15 A के परिपथ में हीटर, रेफ्रिजरेटर, विद्युत इस्तरी इत्यादि को जोड़ा जाता है जबकि 5A के परिपथ में बल्ब, पंखा आदि जोड़ा जाता है। इसलिए 15 A के लाइन को पावर लाइन तथा 5A के लाइन को घरेलू लाइन कहा जाता है।


8. निम्नलिखित की दिशा को निर्धारित करने वाला नियम लिखिए―

(i) किसी विद्युत धारावाही सीधे चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र।

(ii) किसी चुंबकीय क्षेत्र में, क्षेत्र के लंबवत् स्थित विद्युत धारावाही सीधे चालक पर आरोपित बल।

(iii) किसी चुंबकीय क्षेत्र में किसी कुंडली के घूर्णन करने पर उस कुंडली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत धारा।

उत्तर : (i) दाहिने हाथ का अंगुष्ठ नियम : यदि धारावाही तार को दाएँ हाथ की मुट्ठी में इस प्रकार पकड़े कि अंगूठा धारा की दिशा की ओर संकेत करता हो तो अन्य अंगुलियाँ चुम्बकीय क्षेत्र की बल रेखाओं की दिशा व्यक्त करती है।


(ii) फ्लेमिंग का वामहस्त नियम : अपने बामहस्त के अँगूठे, तर्जनी और मध्यमा अंगुली को इस प्रकार फैलाओ कि वह परस्पर समकोण बनाएँ। तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र को निर्दिष्ट करेगी। मध्यमा अँगुली धारा के प्रवाह की दिशा को बताएगी और अंगूठा धारावाही चालक पर लगे बल की दिशा को व्यक्त करेगा।


(iii) फ्लेमिंग का दक्षिणहस्त नियम : अपने दाहिने हाथ की तर्जनी, मध्यमा अंगुली तथा अंगूठे को इस प्रकार फैलाइए कि ये तीनों एक-दूसरे के परस्पर लंबवत् हों। यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा की ओर संकेत करती है तथा अंगूठा चालक की गति की दिशा की ओर संकेत करता है तो मध्यमा चालक में प्रेरित विद्युत धारा की दिशा दर्शाती है।


9. दिए गए चित्र के आधार पर निम्न प्रश्नों के उत्तर दें―


(a) चित्र का उपयुक्त नाम लिखें।

(b) (1) और (2) के नाम लिखें।

(c) किस तरह की ऊर्जा इस उपकरण द्वारा परिवर्तित की जाती है?

(d) इस उपकरण के दो उपयोग लिखें।

(e) आर्मेचर को परिभाषित करें।

उत्तर : (a) विद्युत मोटर

(b) 1 = विभक्त वलय; 2 = ब्रश

(c) एक उपकरण विद्युतीय ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है।

(d) इसका उपयोग रेफ्रीजरेटरों एवं विद्युत पंखों में किया जाता है।

(e) यह आयताकार लोहे के ढाँचे पर विद्युतरोधी ताँबे के तार को अनेक चक्करों से लपेट कर बनायी जाती है।


10. (a) प्रत्यावर्ती धारा तथा दिष्ट धारा में एक प्रमुख अन्तर लिखें।

(b) दिष्ट धारा के दो स्रोतों के नाम लिखें।

(c) किसी धारावाही वृत्ताकार कुंडली के कारण चुंबकीय क्षेत्र

पैटर्न दिखाने के लिए एक प्रयोग का वर्णन करें।

उत्तर : (a) दिष्ट धारा सदैव एक ही दिशा में प्रवाति होती है तथा प्रत्यावर्ती धारा एक निश्चित समयान्तराल के पश्चात् अपनी दिशा बदलती रहती है।


(b) (1) बैट्री (2) डी.सी. जनित्र।


(c) इसके लिए एक गत्ते के दोनों बगलों में खाँचे बनाकर उनसे वृत्ताकार तार पार कराया जाता है। अब उस वृत्ताकार तार से धारा प्रवाहित की जाती है तो उसके इर्द-गिर्द चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। 

गत्ते पर लौह-चूर्ण छिड़ककर धीरे-धीरे थपथपाया जाता है तो देखा जाता है कि चूर्ण के कण चुम्बकित होकर गत्ते पर चुम्बकीय बल रेखाओं के रूप में सज जाती है। ये चुम्बकीय बल रेखाएँ वृत्ताकार तार के बीच में सीधा तथा तार के दोनों सिरों के नजदीक वृत्तीय रूप में रहता है। अर्थात् वृत्त के केन्द्र पर ये बल रेखा वृत्त के समतल पर अभिलम्ब होती है तथा चुम्बकीय क्षेत्र को बढ़ा देता है।




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